200 रुपए के लिए पिता को उतारा मौत के घाट,कोरबा पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार..
कोरबा – जिले में एक कलयुगी पुत्र ने अपने ही पिता की जान ले ली। महज 200 रुपए के लिये वारदात को अंजाम दिया गया। पूरा मामला जिले के पाली थाना क्षेत्र का है।
मामले को लेकर पुलिस ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि दिनांक- 05-08-2024 को मोबाईल फोन से सूचना मिला कि ग्राम नुनेरा चौक पारा में महेश राम ऊर्फ महेन्द्र अगरिया अपने पिता भवन सिंह को ईंट पत्थर से सिर में मारकर हत्या कर दिया है कि सूचना तस्दीकी हेतु वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराकर निरीक्षक चमन सिन्हा थाना प्रभारी पाली हमराह स्टाफ सउनि पुरूषोत्तम सिंह उइके, प्रधान आरक्षक 377 हिरावन सिंह सुरूते, आरक्षक 654 शैलेन्द्र तंवर को लेकर घटना स्थल गया। मौके घटना स्थल निरीक्षण व सूचक पवन सिंह की सूचना पर मौके पर देहाती मर्ग इंटीमेशन क्रमांक 0/2024 धारा-194 बीएनएसएस कायम किया गया प्रथम दृष्टया धारा 103(1), 238 बीएनएस का पाये जाने से मौके पर ही देहाती नालसी 0/2024 धारा 103(1), 238 बीएनएस अपराध पंजीबध्द कर विवेचना में लिया गया।
मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुये पुलिस अधीक्षक कोरबा सिध्दार्थ तिवारी द्वारा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यु.बी.एस. चौहान, एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमति नेहा वर्मा के निर्देशन पर पकंज ठाकुर अनुविभागीय पुलिस अधिकारी कटघोरा जिला कोरबा के मार्गदर्शन पर एवं थाना प्रभारी निरीक्षक चमन सिन्हा के नेतृत्व में विशेष टीम गठित किया गया था कि दिनांक 06/08/2024 को मुखबिर के माध्यम से सूचना मिला कि आरोपी महेश उर्फ महेन्द्र अगरिया, नुनेरा चौक पारा के आसपास घूम रहा है जिसकी तस्दीकी हेतु हमराह स्टाफ के ग्राम नुनेरा पहुंचकर घेराबंदी कर आरोपी को हिरासत में लिया गया।
आरोपी का मेमोरंडम कथन लिया गया जो अपने मेमोरंडम कथन में बताया कि दिनांक 05/08/2024 के दोपहर 12:00 बजे इसके पिता भवन सिंह, जीजा बुधराम दोनो इसके बडे पिताजी के खाली मकान झोपडीनुमा में बैठकर बातचीत कर रहे थे। तब यह वहां जाकर अपने पिता से 200/रू पैसा मांगा जिस पर भवन सिंह विवाद करने लगा। तब यह गुस्से में आकर पास में पड़े ईंट व पत्थर से सिर में मार दिया जिससे इसके पिता बेहोश होकर गिर गया और पास के कुआं में डाल दिया। आरोपी को विधिवत गिरफतार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है।
उक्त कार्यवाही पर निरीक्षक चमन सिन्हा थाना प्रभारी पाली, सउनि पुरूषोत्तम सिंह उइके, प्रधान आरक्षक 377 हिरावन सरूते, आरक्षक 654 शैलेन्द्र तंवर, आरक्षक 61 परमालाल मंझवार, का महत्वूपर्ण योगदान रहा ।