अमेरिका की केंद्रीय खुफिया एजेंसी (CIA) ने माना कि कोरोना महामारी के लिए जिम्मेदार Covid-19 वायरस की उत्पत्ति एक प्रयोगशाला में हुई है। सीआईए का ये दावा ट्रंप सरकार की ओर से चीन की ओर उंगली उठाता है। इसके साथ ही सीआईए ने ये भी स्वीकार किया कि उसे अपनी जासूसी एजेंसी के इस निष्कर्ष पर कम विश्वास है।

शनिवार को रिपोर्ट की गई सार्वजनिक

कोरोना की उत्पत्ति को लेकर यह निष्कर्ष किसी नई खुफिया जानकारी का नतीजा नहीं है। शनिवार को जारी की गई रिपोर्ट पूर्व की बाइडेन सरकार और पूर्व सीआईए निदेशक विलियम बर्न्स के कहने पर पूरी हुई थी। इस बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एजेंसी का नेतृत्व करने के लिए जॉन रैटक्लिफ के आदेश पर इसे शनिवार को सार्वजनिक किया गया, जिन्होंने गुरुवार को सीआईए डायरेक्टर के रूप में शपथ ली है।

एजेंसी को इस निष्कर्ष पर है कम विश्वास

सीआईए के डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ ने बताया कि निष्कर्ष से पता चलता है कि एजेंसी का मानना ​​है कि सबूतों की समग्रता एक प्राकृतिक उत्पत्ति की तुलना में प्रयोगशाला की उत्पत्ति को अधिक संभावित बनाती है। एजेंसी का आकलन इस निष्कर्ष पर कम विश्वास है। इसलिए इस पर राजनीतिक होने का आरोप नहीं लगाया जा सकता है।  

जारी रखी जाएगी जांच

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सीआईए ने यह आकलन किया कि इस महामारी का सबसे संभावित कारण जिसने दुनियाभर में इतनी तबाही मचाई है। वह चीन के वुहान में एक प्रयोगशाला से संबंधित घटना थी। इसलिए हम आगे बढ़ते हुए इसकी जांच जारी रखेंगे।

चीनी अधिकारी जांच में नहीं कर रहे सहयोग

कोरोना की उत्पत्ति को लेकर रिपोर्टें इस बात पर बंटी हुई हैं कि क्या कोरोनो वायरस चीनी प्रयोगशाला से उभरा है? संभवतः गलती से या यह स्वाभाविक रूप से कोरोना वायरस उत्पन्न हुआ है। नए आकलन से बहस सुलझने की संभावना नहीं है। अमेरिकी खुफिया अधिकारियों का कहना है कि चीनी अधिकारियों के सहयोग की कमी के कारण यह कभी हल नहीं हो सकता है।