उत्तराखंड के माणा में आए एवलांच में दबे मजदूरों को निकालने के लिए सेना का रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है। अब तक 50 मजदूरों को बाहर निकाला जा चुका है जिनमें से 4 दम तोड़ चुके हैं। दरअसल आज माणा में आज हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ। तीन घायल मजदूरों को हेलीकॉप्टर से जोशीमठ स्थित मिलिट्री अस्पताल पहुंचाया गया।
आईटीबीपी की हाई एल्टीट्यूड रेस्क्यू टीम डीआईजी मनु महाराज के साथ उत्तराखंड के चमोली जिले के माणा के लिए देहरादून से रवाना हुई। माणा में आज हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ। तीन घायल मजदूरों को हेलीकॉप्टर से जोशीमठ स्थित मिलिट्री अस्पताल पहुंचाया गया।
तीनों गंभीर घायल हैं। माणा क्षेत्र में कल से किए जा रहे रेस्क्यू अभियान में 47 लोगों को सेना और आईटीबीपी की टीम ने खोज लिया है। 6 घायलों को हेलिकॉप्टर से पहुंचाया गया ज्योर्तिमठ सेना चिकित्सालय। चिंता की बात है कि एक मजदूर की बर्फ में दबकर दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक अन्य की हालत गंभीर बनी हुई है।
मौसम साफ होने से माणा हिमस्खलन रैस्क्यू शुरू
उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित माणा के निकट हिमस्खलन हादसे में फंसे 55 मजदूरों, कार्मिकों में 33 को सकुशल निकालने के बाद शेष लोगों को निकालने के लिए शनिवार को माणा में स्थित आई टी बी पी, सेना, बी आर ओ के जवानों अधिकारियों ने रैक्स्यू अभियान सुबह से शुरू कर दिया है।
जिलाधिकारी डाक्टर संदीप तिवारी ने बताया हिमस्खलन में गम्भीर रूप से घायल जिन तीन लोगों का इलाज माणा आई टी बी पी अस्पताल में चल रहा था। उन्हें आज शनिवार को सेना के हेलीकॉप्टर से जोशीमठ सेना अस्पताल में लाया गया है। बताया गम्भीर रूप से घायल और उपचार के लिए लाये गये घायलों की स्थिति नियंत्रण में है।
जिलाधिकारी ने बताया जोशीमठ में एन डी आर एफ के जवान पहुँच गये हैं। एन डी आर एफ के 28 जवान जोशीमठ में उपलब्ध हैं। एस डी आर एफ समेत अन्य सुरक्षा और राहत दल गोविन्द घाट और हनुमान चट्टी में है। जिलाधिकारी ने कहा मौसम साफ हो रहा है। केन्द्र से मिलने वाली सहायता मे तेजी आयेगी
मौसम विभाग ने एहतियात बरतने की सलाह दी
मौसम विभाग ने बारिश, बर्फबारी और एवलांच आने की घटनाओं के बीच एहतियात बरतने की सलाह भी दी है। खासतौर पर ऐसे इलाकों में मानवीय गतिविधियों को फिलहाल स्थगित रखने की सलाह दी गई है, जहां बर्फबारी का दौर लगातार जारी है। ऐसे स्थानों पर रुकने या आश्रय लेने का सुझाव दिया गया है, जहां पर मलबा गिरने, एवलांच आने या बर्फ टूटने का खतरा न हो।